मकर संक्रांति
मकर संक्रांति सिर्फ एक पर्व नहीं है—यह ऊर्जा, उजाला और नए आरंभ का उत्सव है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब उत्तरायण की शुरुआत होती है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत शुभ माना गया है। यह हमें याद दिलाता है कि हमें प्रकृति के नियमों के साथ तालमेल बनाना, अपने अंदर आध्यात्मिक उन्नति करना और सादगी और दान के जरिए खुशियाँ बांटना चाहिए।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है—उत्तर भारत में मकर संक्रांति, तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तरायण, और असम में माघ बिहू। नाम भले ही अलग हों, पर पर्व का मूल भाव एक ही है: सूर्य की पूजा, पवित्र स्नान, दान और पुण्य कमाना।
इस ब्लॉग में हम आपको मकर संक्रांति 2026 के बारे में पूरी जानकारी देंगे—तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, दान और दुर्लभ योग जैसे तिल द्वादशी और वृद्धि योग, ताकि आप इसे सही ढंग से, भक्ति और आनंद के साथ मना सकें।
मकर संक्रांति 2026: सूर्य का संक्रांति काल, तिथि और शुभ मुहूर्त
सूर्य सिद्धांत की गणना के अनुसार, सूर्य 14 जनवरी 2026, बुधवार रात 9:39 बजे धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
चूंकि यह रात्रि में हो रहा है, इसलिए धर्मशास्त्रानुसार पर्व अगले दिन मनाया जाएगा।
- पर्व तिथि: गुरुवार, 15 जनवरी 2026
- स्नान और दान का शुभ समय: सूर्योदय से दोपहर 1:39 बजे तक
- पुण्यकाल: संक्रांति के बाद लगभग 16 घंटे, जिनमें से सूर्योदय के बाद के 7–8 घंटे सबसे उत्तम हैं।
तिल द्वादशी और वृद्धि योग: दुर्लभ और शुभ संयोग
इस साल मकर संक्रांति के साथ दो दुर्लभ योग बन रहे हैं, जो इसे और विशेष बनाते हैं:
- तिल द्वादशी: मान्यता है कि माघ मास की कृष्ण द्वादशी को भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी। संक्रांति और तिल द्वादशी का मिलन अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
- वृद्धि योग: इस योग में किया गया दान, पूजा और जप सामान्य से कई गुना अधिक फलदायी होता है। यह समय समृद्धि, वृद्धि और स्थायित्व के लिए सर्वोत्तम है।
मकर संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व
मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। उत्तरायण को शास्त्रों में देवताओं का दिन और आध्यात्मिक उन्नति का समय माना गया है। इस समय किया गया दान, तप और साधना शीघ्र और स्थायी फल देती है।
महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने उत्तरायण की प्रतीक्षा करते हुए इसी काल में अपने शरीर का त्याग किया था। यह समय मोक्षदायी माना जाता है।
साथ ही यह पर्व फसल की खुशियों और प्रकृति का धन्यवाद करने का समय भी है।
मकर संक्रांति 2026 की पूजा विधि (सरल तरीके से)
- प्रातःकाल उठकर पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करें।
(यदि संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें।) - स्नान करते समय यह मंत्र जपें:
“गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति …” - स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
- तांबे के लोटे में जल, तिल, गुड़ और पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
- आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करें।
- परिवार के स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करें।
गुरुवार को खिचड़ी: मिथक और शास्त्र
कुछ लोग मानते हैं कि गुरुवार को खिचड़ी नहीं खानी चाहिए। लेकिन मकर संक्रांति में तिथि का महत्व दिन से अधिक है।
- मकर राशि शनि देव की राशि है
- खिचड़ी नवग्रहों का प्रतीक है
- संक्रांति पर खिचड़ी का दान और सेवन शनि दोषों को कम करता है
इसलिए 15 जनवरी 2026 को खिचड़ी देना और खाना पूरी तरह से शुभ है।
गंगा एवं तीर्थ स्नान का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति के दिन गंगा या किसी भी पवित्र तीर्थ में स्नान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। सूर्य के उत्तरायण होने से इस दिन जल में विशेष दिव्य शक्ति मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया स्नान पाप क्षय, आत्मशुद्धि और पितृ शांति प्रदान करता है।
जो लोग तीर्थ नहीं जा सकते, वे घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर श्रद्धा पूर्वक स्नान करें। भाव और श्रद्धा के साथ किया गया स्नान भी पूर्ण पुण्य फल देता है।
मकर संक्रांति पर दान का महत्व
स्नान के बाद किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
- तिल और गुड़: स्वास्थ्य और सूर्य की कृपा के लिए
- कंबल और घी: संरक्षण, समृद्धि और पुण्य वृद्धि के लिए
- अन्न दान: दरिद्रता, ग्रह दोष और अभाव को दूर करने के लिए
जैसा शास्त्र कहता है:
“संक्रांतौ दत्तं दानं अक्षयं भवति”
अर्थात: संक्रांति पर किया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता।
मकर संक्रांति पर करें ये दिव्य उपाय
सूर्य दोष, स्वास्थ्य और पितृ शांति के लिए विशेष मार्गदर्शन
मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन की ऊर्जा को संतुलित करने का अवसर है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किए गए छोटे-छोटे आध्यात्मिक उपाय भी बड़े दोषों को शांत करने की क्षमता रखते हैं। विशेष रूप से सूर्य दोष, स्वास्थ्य संबंधी कष्ट और पितृ बाधाओं से मुक्ति के लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना गया है।
सूर्य देव को प्रसन्न करने के सरल उपाय
(सूर्य दोष शांति एवं आत्मबल वृद्धि हेतु)
यदि जीवन में आत्मविश्वास की कमी, कार्यों में रुकावट या पिता से संबंधित समस्याएँ बनी रहती हैं, तो मकर संक्रांति पर ये उपाय अवश्य करें:
- प्रातःकाल स्नान के पश्चात तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प और तिल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें
- अर्घ्य देते समय श्रद्धा से “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें
- गेहूं, गुड़ या तांबे का दान करना सूर्य को बल प्रदान करता है
इन उपायों से तेज, सम्मान, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
आरोग्य और दीर्घायु के लिए संक्रांति के शुभ उपाय
(शरीर, मन और ऊर्जा संतुलन हेतु)
मकर संक्रांति को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है:
- स्नान के बाद कुछ समय सूर्य की किरणों में बैठकर ध्यान करें
- तिल और गुड़ से बने पदार्थों का सेवन करें, जिससे शरीर में ऊष्मा और शक्ति बनी रहती है
- असहाय, वृद्ध या जरूरतमंद लोगों को कंबल, वस्त्र या अन्न का दान करें
ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और आयु में वृद्धि करता है।
पितृ कृपा और ग्रह शांति प्राप्त करने के उपाय
(पितृ दोष एवं जीवन बाधाओं से मुक्ति हेतु)
यदि परिवार में बार-बार परेशानियाँ, आर्थिक अड़चनें या मानसिक अशांति बनी रहती है, तो यह पितृ असंतोष का संकेत हो सकता है:
- स्नान के पश्चात पितरों का स्मरण कर तिल मिश्रित जल से तर्पण करें
- कौवों, गाय या किसी ब्राह्मण को श्रद्धा से भोजन कराएं
- काले तिल, अन्न या वस्त्र का दान ग्रह दोष और पितृ दोष शांति में सहायक होता है
इन उपायों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में स्थिरता व शांति आती है।
Read moe:
माँ विंध्यवासिनी मंदिर मिर्जापुर | Durga Suktam – दुर्गा सूक्तम् With Lyrics and Meaning
निष्कर्ष
मकर संक्रांति 2026 केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सूर्य परिवर्तन, दुर्लभ योग और अक्षय पुण्य का दिव्य संगम है। सही समय पर स्नान, पूजा और दान करने से आध्यात्मिक उन्नति, स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है।
इस ब्लॉग में हमने मकर संक्रांति 2026 की पूरी जानकारी दी—तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, दान और दुर्लभ योग—ताकि आप इसे सही भक्ति और समझ के साथ मना सकें।
Vedaangam आपको सरल और शुद्ध शास्त्रीय मार्गदर्शन देता है, ताकि आप हर पर्व को केवल परंपरा नहीं, बल्कि सही विधि और भावना के साथ मना सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: मकर संक्रांति 2026 कब मनाई जाएगी?
उत्तर: मकर संक्रांति 2026 15 जनवरी 2026, गुरुवार को शास्त्रानुसार मनाई जाएगी।
प्रश्न 2: स्नान और दान का शुभ समय कब है?
उत्तर: सूर्योदय से दोपहर 1:39 बजे तक।
प्रश्न 3: क्या गुरुवार को खिचड़ी का दान किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, तिथि का महत्व दिन से अधिक है, इसलिए यह पूर्णतः शुभ है।
प्रश्न 4: तिल द्वादशी और वृद्धि योग का महत्व क्या है?
उत्तर: इस दुर्लभ योग में किया गया दान और पूजा अक्षय पुण्य देती है और जीवन में वृद्धि लाती है।
प्रश्न 5: इस दिन किस देवता की विशेष कृपा मिलती है?
उत्तर: सूर्य देव और शनि देव दोनों की कृपा प्राप्त होती है, जिससे ग्रह दोष कम होते हैं और जीवन में तेज आता है।

