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Saraswati Dwadasnaam Strotram

बसंत पंचमी – माँ सरस्वती की आराधना का महापर्व – Saraswati Dwadasa Nama Stotram with Lyrics

बसंत पंचमी माँ सरस्वती की आराधना का पावन और शुभ महापर्व है, जो ज्ञान, विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी को समर्पित होता है। यह पर्व माघ मास की शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन प्रकृति में नवजीवन, उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, चारों ओर पीले फूल खिल उठते हैं और खेतों में सरसों लहलहाने लगती है। बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की प्रतिमा को पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं, पीले रंग के पकवान बनाए जाते हैं और विद्यार्थी अपनी पुस्तकों, कलम व वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं। यह दिन शिक्षा की शुरुआत, रचनात्मकता और बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। बसंत पंचमी हमें ज्ञान के मार्ग पर चलने, अज्ञानता को दूर करने और जीवन में सृजनात्मक सोच को अपनाने की प्रेरणा देती है। 🌼📚✨
इस वर्ष अत्यंत विशेष योग के साथ आ रहा है?

पंचांग के अनुसार,
माघ शुक्ल पंचमी तिथि का आरंभ
23 जनवरी 2026 को प्रातः 02 बजकर 29 मिनट से होगा,
और इसकी समाप्ति
24 जनवरी 2026 को प्रातः 01 बजकर 46 मिनट तक रहेगी।

उदया तिथि के अनुसार
23 जनवरी 2026, गुरुवार को
बसंत पंचमी और माँ सरस्वती का पूजन किया जाएगा।

इस वर्ष ज्योतिषीय दृष्टि से
सूर्य मकर राशि में,
चन्द्रमा मीन राशि में,
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और शिव योग का विशेष संयोग बन रहा है,
जो विद्या, बुद्धि और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

सरस्वती पूजन और विद्यारंभ का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा
प्रातः 07 बजकर 56 मिनट से
अपराह्न 01 बजकर 59 मिनट तक।

जो साधक चाहें, वे
24 जनवरी को सूर्योदय तक भी
जप, पूजन और विद्यारंभ कर सकते हैं।

पूजन में स्वेत या पीले वस्त्र धारण करें,
माँ सरस्वती को पुष्प, दीप, अक्षत अर्पित करें,
और “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मूल  मंत्र का जप करें।

श्री सरस्वती स्तोत्रम् – विद्या प्राप्ति मंत्र

अथ सरस्वती द्वादशनाम स्तोत्रम्

सरस्वतीमहं वन्दे वीणापुस्तकधारिणीम् ।

हंसवाहसमायुक्तां विद्यादानकरीं मम ॥ १ ॥

प्रथमं भारती नामा द्वितीयं च सरस्वती ।

तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहनी ॥ २ ॥

पञ्चमं जगतीख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा ।

कौमारी सप्तमं प्रोक्तमष्टमं ब्रह्मचारिणी ॥ ३ ॥

नवमं बुद्धिधात्री च दशमं वरदायिनी ।

एकादशं क्षुद्रघण्टा द्वादशं भुवनेश्वरी ॥ ४ ॥

ब्राह्मी द्वादश नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।

सर्वसिद्धिकरी तस्य प्रसन्ना परमेश्वरी ।

सा मे वसतु जिह्वाग्रे ब्रह्मरूपा सरस्वती ॥ ५ ॥

इति श्री सरस्वती द्वादशनाम स्तोत्रम् सम्पूर्णं   ॥

माँ सरस्वती की कृपा से आपका जीवन ज्ञान से प्रकाशित हो |

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