वसंत की मोहक सुगंध और प्रकृति के नव-पल्लवन के साथ ही आदिशक्ति जगदंबा की उपासना का महापर्व ‘वासंतिक नवरात्र’ इस वर्ष अत्यंत शुभ संयोगों में आ रहा है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाली यह नौ दिवसीय साधना केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के शुद्धिकरण का काल है।
वर्ष 2026 में यह महापर्व 19 मार्च, गुरुवार से आरंभ हो रहा है। आइए, शास्त्रों के प्रकाश में इस वर्ष की नवरात्रि की तिथियों, कलश स्थापना के सटीक समय और साधना के विशेष विधानों को विस्तार से समझते हैं।
कलश स्थापना मुहूर्त और तिथियों का गणित
इस वर्ष तिथियों के संजोग को समझना अत्यंत आवश्यक है। शास्त्रीय गणना के अनुसार, चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 19 मार्च, गुरुवार को प्रातः 6:41 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात प्रतिपदा तिथि का आगमन होगा।
यद्यपि सूर्योदय के समय अमावस्या व्याप्त है, किंतु उदयातिथि के शास्त्रोक्त नियमों और पूरे दिन प्रतिपदा की व्याप्ति होने के कारण, कलश स्थापना और नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च को ही होगा।
- कलश स्थापना तिथि: 19 मार्च 2026, गुरुवार।
- विशेष निर्देश: सूर्योदय के पूर्व (प्रातः 5:30 बजे तक) अमावस्या का प्रभाव होने के कारण, कलश स्थापना और भगवती का पूजन प्रातः 6:41 के पश्चात करना श्रेष्ठ रहेगा।
नौ दिवसीय साधना चक्र (19 मार्च से 27 मार्च)
इस वर्ष नवरात्रि पूरे नौ दिनों की है, जो साधकों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी है। प्रत्येक दिन देवी के एक विशिष्ट स्वरूप को समर्पित है:
- 19 मार्च (प्रतिपदा): माँ शैलपुत्री पूजन एवं कलश स्थापना।
- 20 मार्च (द्वितीया): माँ ब्रह्मचारिणी की तपस्या और संयम।
- 21 मार्च (तृतीया): माँ चंद्रघंटा की आराधना।
- 22 मार्च (चतुर्थी): माँ कुष्मांडा का पूजन।
- 23 मार्च (पंचमी): माँ स्कंदमाता की ममतामयी उपासना।
- 24 मार्च (षष्ठी): माँ कात्यायनी की पूजा एवं चैत्र छठ व्रत।
- 25 मार्च (सप्तमी): माँ कालरात्रि की महानिशा पूजा।
- 26 मार्च (अष्टमी): माँ महागौरी पूजन (महाअष्टमी)।
- 27 मार्च (नवमी): माँ सिद्धिदात्री एवं भगवान श्रीराम जन्मोत्सव।
चैत्र छठ, महानिशा और अन्नपूर्णा परिक्रमा
वासंतिक नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष पर्व और परिक्रमाएं भी संपन्न होती हैं जो इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ा देती हैं:
- चैत्र छठ व्रत: सूर्यदेव की उपासना का यह महापर्व 24 मार्च को होगा। व्रती माताएं इस दिन सूर्य षष्ठी का कठिन निर्जला व्रत रखेंगी। 25 मार्च को प्रातः काल उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात पारण संपन्न होगा।
- महानिशा पूजा: तंत्र और शक्ति साधना के लिए जानी जाने वाली महानिशा पूजा 25 मार्च की अर्धरात्रि को संपन्न होगी।
- अन्नपूर्णा परिक्रमा: धर्म नगरी काशी में अन्नपूर्णा परिक्रमा का विशेष विधान है। यह परिक्रमा 25 मार्च को सायं 4:54 बजे से प्रारंभ होकर 26 मार्च को अपराह्न 2:32 बजे तक चलेगी। भक्त इस अवधि में माँ अन्नपूर्णा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
महाअष्टमी, महानवमी और व्रत पारण विधान
साधना की पूर्णता के लिए तिथियों और पारण के समय का ध्यान रखना अनिवार्य है:
- महाअष्टमी: 26 मार्च को महाअष्टमी का व्रत रखा जाएगा।
- महानवमी व श्रीराम जन्मोत्सव: 27 मार्च को चैत्र शुक्ल नवमी तिथि है। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव दोपहर 12:00 बजे धूमधाम से मनाया जाएगा।
- हवन व पूर्णाहुति: पाठ और हवन की पूर्णाहुति 27 मार्च को मध्याह्न 12:30 बजे तक नवमी तिथि में ही संपन्न कर लेनी चाहिए।
पारण का समय:
- चढ़ती-उतरती व्रत रखने वाले: जो भक्त प्रथम और अंतिम व्रत रखते हैं, वे 26 मार्च को अष्टमी का उपवास करेंगे और 27 मार्च को नवमी तिथि में पारण करेंगे।
- महानवमी व्रत करने वाले: इनका पारण 28 मार्च को प्रातः 10:30 बजे तक होगा।
- संपूर्ण नवरात्रि व्रत करने वाले: वे 27 मार्च को मध्याह्न 12:30 के बाद या फिर 28 मार्च को प्रातः दशमी तिथि लगने पर पारण कर सकते हैं।
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निष्कर्ष
चैत्र नवरात्रि Chaitra Navratri केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नव-संवत्सर के आरंभ में स्वयं को शक्ति संपन्न करने का अनुष्ठान है। 19 मार्च से 27 मार्च तक चलने वाला यह महापर्व श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का संगम है। वेद, पुराण और शास्त्रों के अनुसार विधि-विधान से की गई साधना अनंत सुख और शांति प्रदान करती है।

