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होली 2026: होलिका दहन, चंद्रग्रहण और रंगोत्सव, जानिए सही तारीख और शुभ मुहूर्त

इस बार होली Holi का त्योहार अपने साथ एक अनोखी स्थिति लेकर आया है। जहाँ हर साल होलिका दहन के अगले दिन होली मनाई जाती है, वहीं इस बार होलिका दहन और होली के बीच चंद्रग्रहण का सूतक आ गया है। इस कारण इस बार होली तीन दिनों में फैल गई है। आइए विस्तार से समझते हैं कि होलिका दहन कब होगा, मुहूर्त क्या रहेगा और होली किस दिन मनाना शास्त्रसम्मत होगा।

फाल्गुन पूर्णिमा 2026, तिथि और समय

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का आरंभ 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 21 मिनट से होगा और यह तिथि 3 मार्च 2026 को शाम 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। शास्त्रीय विधान के अनुसार होलिका दहन प्रदोष काल और रात्रि व्यापिनी पूर्णिमा में किया जाता है और यह कालखंड 2 मार्च की रात को ही प्राप्त होता है। इसलिए होलिका दहन 2 मार्च 2026 को किया जाएगा।

भद्रा और होलिका दहन मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि के आरंभ के साथ ही भद्रा भी लग जाएगी। हिंदू धर्मशास्त्र में भद्रा काल को अशुभ माना गया है और इसमें कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य वर्जित होता है। ऐसे में सामान्यतः होलिका दहन Holika Dahan संभव नहीं लगता, परंतु इसका समाधान धर्मसिंधु ग्रंथ में मिलता है।

धर्मसिंधु में स्पष्ट उल्लेख है कि “निशीथोत्तरं भद्रासमाप्तौ मुखं त्यक्त्वा भद्रायामेव हालिकादाहः।” इसका अर्थ है कि भद्रा के मुखकाल को छोड़कर भद्रा के पुच्छकाल में होलिका दहन किया जा सकता है। भद्रा की पूँछ का समय शुभ माना गया है और इस वर्ष यह पुच्छकाल 2 मार्च की रात एक बजे के बाद आएगा।

होलिका दहन 2026 शुभ मुहूर्त: 2 मार्च 2026, रात्रि 1 बजे के पश्चात।

चंद्रग्रहण 2026 और सूतक काल, 3 मार्च

अब यहीं से असली बात शुरू होती है। स्वाभाविक रूप से होलिका दहन के अगले दिन यानी 3 मार्च को होली मनाई जानी चाहिए, परंतु उसी दिन चंद्रग्रहण है। 3 मार्च 2026 को ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण Chandra Grahan होगा। ग्रहण का वास्तविक स्पर्श दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से होगा, चंद्रोदय के बाद ग्रहण दर्शन शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगा और ग्रहण मोक्ष शाम 6 बजकर 48 मिनट पर होगा।

चूँकि ग्रहण के समय चंद्रमा उदित नहीं होगा इसलिए इसका धार्मिक मान चंद्रोदय के पश्चात से लिया जाएगा। किंतु सूतक काल की गणना ग्रहण से नौ घंटे पूर्व से होती है। इस हिसाब से सामान्य जन के लिए 3 मार्च को प्रातः 6 बजकर 20 मिनट से सूतक आरंभ हो जाएगा। जो बालक, वृद्ध या रोगी हैं उनके लिए सूतक चार घंटे पहले लगता है, यानी उनके लिए दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से ही सूतक शुरू हो जाएगा।

सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य, उत्सव या पर्व मनाना वर्जित होता है। चूँकि 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से ही सूतक लग जाएगा इसलिए उस दिन होली का कोई मुहूर्त शेष नहीं बचता।

होली 2026 कब है, 4 मार्च

उपरोक्त सभी कारणों से इस वर्ष होली यानी रंगोत्सव 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। यही धर्मशास्त्र का विधान है और यही ज्योतिर्विदों का भी मत है।

होली 2026 का संपूर्ण कैलेंडर, एक नजर में

  • होलिका दहन: 2 मार्च 2026, रात्रि 1 बजे के पश्चात, भद्रा पुच्छकाल में
  • चंद्रग्रहण एवं सूतक: 3 मार्च 2026, सामान्य जन हेतु प्रातः 6:20 से, बालक, वृद्ध और रोगी हेतु दोपहर 1:59 से
  • होली और रंगोत्सव: 4 मार्च 2026, प्रातःकाल से

इस बार होली का पर्व भले ही एक दिन विलंब से आया हो परंतु यही शास्त्रसम्मत और धर्मानुकूल विधान है। आप सभी को होलिका दहन और होली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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